भारत सरकार ने देश को अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग ने प्रधानमंत्री रिसर्च चेयर योजना 2026 (Prime Minister Research Chair – PMRC) के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह योजना भारत के वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई एक प्रमुख राष्ट्रीय पहल है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, प्रयोगशालाओं और उद्योगों में कार्यरत भारतीय मूल के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को भारत के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों एवं राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्रों से जोड़ना है। इसके माध्यम से भारत वैश्विक भारतीय प्रतिभा का लाभ उठाकर अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में अपनी क्षमता को और मजबूत बनाना चाहता है।
क्या है प्रधानमंत्री रिसर्च चेयर योजना 2026 (Prime Minister Research Chair – PMRC) ?
प्रधानमंत्री रिसर्च चेयर (PMRC) योजना भारत सरकार की एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य विदेशों में कार्यरत भारतीय मूल के उत्कृष्ट वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को भारत के अनुसंधान एवं नवाचार तंत्र से जोड़ना है।
यह योजना भारत के तेजी से विकसित हो रहे Research, Development and Innovation Ecosystem को वैश्विक विशेषज्ञता से जोड़ने का कार्य करेगी। इसके माध्यम से देश के प्रमुख सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और अनुसंधान केंद्रों में उच्च स्तरीय अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
यह भी पढ़ें : 👉 पीएम-अजय पोर्टल & मोबाइल ऐप लॉन्च
योजना का मुख्य उद्देश्य
PMRC योजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- विश्वभर में कार्यरत भारतीय मूल के प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को भारत से जोड़ना।
- राष्ट्रीय महत्व के क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना।
- भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना।
- उद्योग, शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत बनाना।
- विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु वैज्ञानिक आधार तैयार करना।
- भारत को वैश्विक अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करना।
किन क्षेत्रों में होगा अनुसंधान?
PMRC योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय प्राथमिकता के 13 प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है:
- उन्नत कंप्यूटिंग (AI, Quantum Computing और Supercomputing)
- सेमीकंडक्टर
- ऊर्जा, स्थिरता और जलवायु परिवर्तन
- साइबर सुरक्षा
- स्वास्थ्य सेवा एवं मेडिकल टेक्नोलॉजी
- जैव प्रौद्योगिकी
- उन्नत सामग्री एवं महत्वपूर्ण खनिज
- अंतरिक्ष एवं रक्षा
- अगली पीढ़ी की संचार तकनीक
- विनिर्माण एवं इंडस्ट्री 4.0
- कृषि एवं खाद्य प्रौद्योगिकी
- ब्लू इकोनॉमी
- परमाणु ऊर्जा
इन क्षेत्रों को भारत के भविष्य के विकास और आत्मनिर्भरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
यह भी पढ़ें : 👉 म.प्र. अतिथि शिक्षक पोर्टल 2026
योजना के प्रमुख स्तंभ
PMRC योजना तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है:
1. लीड संस्थान (Lead Institutions): ये संस्थान योजना के संचालन और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
2. होस्ट संस्थान (Host Institutions): जहां चयनित वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता कार्य करेंगे।
3. PMRC फेलो : वे शोधकर्ता, वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ जो योजना के अंतर्गत चयनित होंगे।
योजना के तहत उपलब्ध श्रेणियां
योजना के अंतर्गत तीन प्रकार के अवसर प्रदान किए जाएंगे:
यंग रिसर्च फेलो : प्रारंभिक करियर के शोधकर्ताओं के लिए।
सीनियर रिसर्च फेलो : अनुभवी और स्थापित शोधकर्ताओं के लिए।
रिसर्च चेयर : विश्व स्तर पर ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिकों एवं अनुसंधान क्षेत्र के दिग्गजों के लिए।
कौन कर सकता है आवेदन?
PMRC योजना के लिए निम्न पात्र होंगे:
- विदेशों में कार्यरत भारतीय नागरिक
- OCI (Overseas Citizen of India) कार्डधारक
- भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO)
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों एवं उद्योगों में कार्यरत विशेषज्ञ
योजना का उद्देश्य केवल उच्च उपलब्धियां रखने वाले वैज्ञानिकों एवं पेशेवरों को आकर्षित करना है।
कौन से संस्थान बन सकेंगे होस्ट संस्थान?
योजना के तहत निम्न संस्थान पात्र होंगे:
- NIRF की Overall या Engineering Category में Top 100 सरकारी संस्थान
- NIRF Research Category में Top 50 संस्थान
- DST, DBT, ICMR एवं CSIR जैसी एजेंसियों के अंतर्गत राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं एवं अनुसंधान संस्थान
प्रमुख लीड संस्थान
भारत सरकार ने सात प्रमुख संस्थानों को Lead Institution के रूप में चुना है:
- IIT Delhi
- IIT Bombay
- IIT Madras
- IIT Kanpur
- IIT Hyderabad
- IIT (ISM) Dhanbad
- IISc Bengaluru
यह भी पढ़ें : 👉 BHAVYA योजना 2026
योजना का बजट
केंद्रीय बजट 2026-27 में PMRC योजना के लिए ₹200 करोड़ का प्रारंभिक बजट प्रावधान किया गया है। यह योजना उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान क्षेत्र की नई प्रमुख योजनाओं में शामिल है।
लाभ किसे मिलेगा?
शोधकर्ताओं को लाभ
- भारत में विश्वस्तरीय अनुसंधान करने का अवसर।
- अनुसंधान अनुदान (Research Grant) और फेलोशिप सहायता।
- अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं तक पहुंच।
- राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं पर कार्य करने का अवसर।
संस्थानों को लाभ
- वैश्विक विशेषज्ञों के साथ सहयोग।
- अंतरराष्ट्रीय शोध साझेदारी।
- अनुसंधान गुणवत्ता में वृद्धि।
- नवाचार एवं पेटेंट गतिविधियों को बढ़ावा।
देश को लाभ
- उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान का विकास।
- नई तकनीकों का निर्माण।
- आत्मनिर्भर भारत मिशन को मजबूती।
- वैश्विक प्रतिभा का भारत की प्रगति में योगदान।
यह भी पढ़ें : 👉 पीएम इंटर्नशिप योजना – 2026
आवेदन प्रक्रिया
PMRC योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन आमंत्रित किए गए हैं।
आवेदन कैसे करें?
- आधिकारिक पोर्टल पर जाएं।
- पात्रता मानदंड पढ़ें।
- ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें।
- आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
- आवेदन जमा करें।
आवेदन कब शुरू हुए?
PMRC योजना 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 जून 2026 से प्रारंभ कर दी गई है।
आधिकारिक वेबसाइट
| Official Website | Click Here |
| Official Release Hindi | Click Here |
| Official Releas English | Click Here |
| Join us on Telegram Group | Join Now |
| Join us on Whatsapp Channel | Join Now |
| For Job Updates Join Whatsapp Channel | Join Now |
यहीं से आवेदन, दिशा-निर्देश और पात्रता संबंधी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
| मध्य प्रदेश की अन्य लेटेस्ट भर्ती – 2026 |
| मध्यप्रदेश पचमढ़ी छावनी भर्ती – 2026 |
| मध्यप्रदेश हाईकोर्ट भर्ती – 2026 विभिन्न पदों पर भर्ती |
| मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण भर्ती – 2026 |
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री रिसर्च चेयर (PMRC) योजना 2026 भारत सरकार की एक दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य वैश्विक भारतीय प्रतिभा को देश के वैज्ञानिक और नवाचार भविष्य से जोड़ना है। ₹200 करोड़ के प्रारंभिक बजट के साथ शुरू की गई यह योजना भारत को अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में भारत विश्वस्तरीय अनुसंधान और तकनीकी विकास का प्रमुख केंद्र बन सकता है।